एक रात और समाप्ति: दो कहानियां
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एक रात - एक ऐसे अबोध युवक की कहानी जो पहले अपने प्रेम को समझ नहीं पाया और जब जाना-समझा तो बहुत देर हो चुकी थी। फिर एक ही रात में उसका पूरा जीवन सार्थक कैसे बन जाता है...?
समाप्ति - पति अपनी पत्नी के प्रेम में आसक्त है; पत्नी अनजान है या अबोध वह नहीं जानता... पर पत्नी का मन जीतने के लिये अटल है, आत्म-संयमित है; वह अपने कर्त्तव्य एवं अधिकार समझता है और दाम्पत्य जीवन की नैतिक मर्यादाएं भी... क्या ऐसा एक तरफा प्रेम सफल हो सकता है? एक ऐसे पात्र की कहानी जिसकी मृत माँ अपने पुत्र के नैतिक मार्ग से विचलित होते ही उसके कवच का रूप धारण कर लेती है।
Author
रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941) के बहुमुखी साहित्य को विलक्षण और सफल साधना कहा जा सकता है। वह केवल कुशल कथाकार ही नहीं थे बल्कि उन्होंने साहित्य की बहुत-सी विधाओं का संस्कार किया और उन्हें भारतीय संदर्भ और पहचान देकर विश्व-साहित्य के समकक्ष ला खड़ा किया।
टैगोर ने लगभग नब्बे कहानियों की रचना की; इनकी अधिकतम कहानियां अपनी औपचारिक समाप्ति के बाद भी हमारे मन में एक अजीब-सा कौतूहल और जिज्ञासा का भाव जगाये रखती हैं और इस बात का बार-बार अहसास कराती हैं कि कहानी भले ही खत्म हो गई उसका वक्तव्य या अनुरोध अब भी उसी तीव्रता के साथ मौजूद है... इतने वर्षों के बाद भी।
1913 में उन्हें उनके काव्य-संग्रह गीतांजलि के लिए साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया जिसका अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ।
Book Details
Format: eBook | Language: Hindi | Translator: Dhanyakumar Jain